लखनऊ: लोहिया संस्थान की इमरजेंसी में बुजुर्ग मरीज को भर्ती नहीं किया गया. मिन्नतों के बाद भी डॉक्टरों ने मरीज को हाथ तक नहीं लगाया. निराश परिवारीजन मरीज को एम्बुलेंस से वापस घर ले जा रहे थे. इस दौरान रास्ते में मरीज की मौत हो गई. परिजनों का कहना है कि यदि समय पर मरीज को इलाज मिल जाता तो शायद जान बच जाती.
आजमगढ़ के कोट मोहल्ला निवासी चुन्नी (70) को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. परिवारीजनों ने स्थानीय अस्पताल में दिखाया. मगर हालत में सुधार होने के बजाए गड़बड़ा गई. ऐसे में गुरुवार को सुबह 11 बजे लोहिया संस्थान की इमरजेंसी में पहुंचे. परिवार के सदस्य विजय सोनकर का आरोप है कि डॉक्टर ने मरीज को भर्ती नहीं किया.
डॉक्टरों ने बेड खाली न होने की बात बताई और मरीज को केजीएमयू ले जाने की सलाह दी. इस दौरान प्राथमिक उपचार भी मुहैया नहीं कराया गया. कई बार डॉक्टरों से मरीज को देखने की गुजारिश की गई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई. ऐसे में मरीज को घर ले जाने का फैसला किया गया. जहां एम्बुलेंस से वापस घर लाते समय रास्ते में मरीज की सांसें थम गई.
लोहिया संस्थान के प्रवक्ता डॉ. श्रीकेश सिंह ने घटना की जानकारी से इनकार किया. उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में सभी मरीजों को प्राथमिक उपचार मुहैया कराने के निर्देश दिए गए हैं. कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए सभी मरीजों को इलाज मुहैया कराया जा रहा है. यदि शिकायत मिलती है तो मामले की जांच कराई जाएगी.