लखनऊ: सीएम योगी ने अधिकारियों को मां गंगा की गोद में मिली 21 दिन की मासूम ‘गंगा’ के पालन-पोषण की जिम्मेदारी दी है. सीएम ने कहा है कि नवजात गंगा का पालन चिल्ड्रेन होम में सरकारी खर्चे पर अच्छे से किया जाए. जिलाधिकारी समेत संबंधित विभाग पूरी सहायता करें.
इसके साथ ही नवजात को बचाने वाले नाविक को तत्काल सरकारी आवास समेत सभी सरकारी सहायता देने के सीएम ने निर्देश दिए हैं. प्रदेश में अनाथ बच्चों के लिए संचालित सभी योजनाओं का लाभ मासूम गंगा को दिया जाएगा. बाल गृह में रहने, उसकी पढ़ाई और उसके भरण पोषण की जिम्मेदारी सरकार की तरफ से उठाई जाएगी.
बता दें कि ‘मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ के तहत अनाथ बच्चों के भरण-पोषण से लेकर पढ़ाई-लिखाई और नौकरी योग्य बनाने तक की पूरी जिम्मेदारी उठाई जाती है. इस योजना का भी लाभ मासूम गंगा को दिया जाएगा. इस योजना के तहत अनाथ बच्चों को गोद लेने वाले को चार हजार रुपये प्रति माह, उसके बालिग होने तक दिए जाने की व्यवस्था है. सरकार की तरफ से उसकी निगरानी की जाएगी.
लकड़ी के बक्से में बंद मिली ‘गंगा’
दरअसल, गाजीपुर जिले के ददरी घाट के पास गंगा नदी में सोमवार सुबह एक नवजात बच्ची बक्से में बंद मिली. हवा के कारण पानी में तैर रहा लकड़ी का बक्सा किनारे आ गया था. लोगों ने उसमें किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनी. फिर एक मल्लाह गुल्लू ने बक्से को पानी से बाहर निकाला. बक्सा खोला तो उसमें एक बच्ची मिली.
मल्लाह गुल्लू ने बताया कि गाजीपुर के ददरी घाट पर सोमवार को सुबह करीब 8 बजे गंगा नदी में एक लकड़ी का बक्सा मिला. उसमें 21 दिन की एक बच्ची रो रही थी. बक्से में देवी दुर्गा और भगवान विष्णु का चित्र लगा था. नन्हीं बच्ची के कमर में चुनरी बंधी थी. साथ में बच्ची की जन्मकुंडली भी रखी हुई थी. इसी कुंडली से पता चला कि बच्ची का नाम भी गंगा है और वह 21 दिनों की हैं.
नन्हीं सी जान को बक्से में बंद कर किसने फेंका और कहां फेंका, इसका पता तो नहीं चल पाया है, लेकिन बच्ची गंगा जैसी विशाल नदी में जिंदा रह गई, यह चमत्कार से कम नहीं है. इस खूबसूरत नन्हीं परी को मल्लाह गुल्लू ने बचाया. गुल्लू उस बच्ची को अपने घर ले आया.