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Wednesday, January 21, 2026

ब्लैक, व्हाइट और यलो के बाद अब देश के इस राज्य में आया Green Fungus का पहला मामला

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मध्य प्रदेश के सबसे तेजी से बढ़ते शहर इंदौर में पोस्ट कोविड बीमारियों के काफी मामले सामने आ रहे है. इंदौर के सरकारी और निजी अस्पतालों में इन दिनों ब्लैक फंगस के शिकार करीब 500 से ज्यादा केस आए है. वहीं हैरत की बात ये है कि इंदौर में अब ग्रीन फंगस का मरीज सामने आया है और ये देश का पहला मामला है.
दरअसल इंदौर में कोरोना की दूसरी लहर ने जमकर कहर मचाया था, जो अब बहुत हद तक शांत भी हो चुकी है. लेकिन अब इंदौर में बीमारियों के जंजाल में एक नए फंगल इंफेक्शन का मामला सामने आया है, जो देश का पहला मामला है. दरअसल, पोस्ट कोविड बीमारियों के लिहाज से अब तक ब्लैक, व्हाइट और यलो फंगस के मामले सामने आए थे. लेकिन इंदौर में अब देश का पहला ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें मरीज 90 दिन के इलाज के बाद ग्रीन फंगस का शिकार हुआ है.
लंग्स में मिला ग्रीन फंगस
स्वास्थ्य विभाग की अधिकारी डॉ. अपूर्वा तिवारी ने बताया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को इंदौर के अरविंदो हॉस्पिटल से एक रिपोर्ट प्राप्त हुई है, जिसमें विशेषज्ञ डॉक्टर रवि डोशी ने बताया कि 34 वर्षीय विशाल श्रीधर नामक युवक पिछले डेढ़ माह से अरविंदो हॉस्पिटल में अपना इलाज करा रहे थे, लेकिन उनके लंग्स का 90 प्रतिशत इन्वॉल्वमेंट खत्म नही हो रहा था जबकि उनका हर मुमकिन इलाज किया गया था. इसके अरविंदो हॉस्पिटल में उनके लंग्स की जांच कराई गई तो पता चला कि मरीज के लंग्स में ग्रीन कलर का एक फंगस मिला है. जिसे म्युकर नहीं कहा जा सकता है. इसलिये उसे म्यूकर मायकोसिस नही कहा जा सकता है.
उन्होंने बताया कि उसके हरे रंग के कारण उसे ग्रीन फंगस नाम दिया गया है. डॉ. अपूर्वा ने बताया कि ये देश मे पहला केस है जिसमें ग्रीन कलर का फंगस किसी इंसान के लंग्स में मिला है. वही उन्होंने बताया कि निजी चार्टर्ड प्लेन से विशाल श्रीधर नामक मरीज को मुंबई के हिंदुजा हॉस्पिटल रैफर कर दिया गया है. वही डॉ.रवि डोशी लगातार मुम्बई के डॉक्टर्स के संपर्क रहकर मरीज की कंडीशन पर नजर बनाए हुए हैं.
यंग मरीज के अंदर मिला ग्रीन फंगस
दूसरी तरफ, मरीज का इलाज कर रहे अरविन्दो हॉस्पिटल के डॉ रवि डोशी ने बताया कि यह ग्रीन फंगस यंग मरीज़ के अंदर मिला है. यह उस व्यक्ति के सायनस में लंग्स में ओर ब्लड में मिला है. यह व्यक्ति पहले से कोविड मरीज थे जिससे उनके फेफड़े काफ़ी डेमेज थे. पिछले दो माह से कोविड का इलाज चल रहा था. डिस्चार्ज होने के बाद में यह फिर बीमारी सामने आई जांच की गई, उसके बाद एसपरजीलस की बात सामने आई.
डॉ रवि डोशी, अरविन्दो हॉस्पिटल टीवी चेस्ट विभाग प्रोफेसर ने बताया कि एसपरजिल्स के लक्षण की बात करें तो नाक में से खून आना, नाक बंद होने से सर्दी हो जाना, सरदर्द करना और बुखार आना ऐसे कई प्रकार के लक्षण है. उन्होंने कहा कि हमने अभी कई समय से कोविड-19 के इलाज के दौरान यह ऐसा पहला मामला है जहां जो कि ऐसे लक्षण सामने आए हैं. यह उतना ही घातक है जितना कोविड या म्यूकोमाइक्रोसिस. गौरतलब है कि इसस पहले केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि फंगस को किसी भी रंग के नाम से नहीं पहचाना जाना चाहिए.
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