ऐसे में बुधवार को पशुपति पारस पटना पहुंचे और गुरुवार को बैठक बुलाई गई, जिसमें उन्हें अध्यक्ष चुना गया. हालांकि, बैठक में सांसद प्रिंस राज शामिल नहीं हुए. राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चा है कि पशुपति पारस बीते कई महीने से तख्तापलट के फिराक में थे. चिराग ने खुद भी इस बात को स्वीकार किया है. उन्होंने अपने चाचा पशुपति पारस पर धोखा देने का आरोप लगाया है.
इधर, सांसद पशुपति पारस का कहना है कि उन्होंने पार्टी तोड़ी नहीं, बल्कि बचाई है. विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी का अस्तित्व धीरे-धीरे खत्म हो रहा था. ऐसे में रामविलास पासवान की पार्टी और उनके सोच को बचाने के लिए ये फैसला लिया गया है. वहीं, पशुपति गुट में शामिल नेताओं का भी यही कहना है.