बड़े भाई रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan) के चलते राजनीति में आने वाले सांसद पशुपति पारस (Pashupati Paras) को मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिली है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. पशुपति पारस दिनों सुर्खियों में हैं. दलित सेना (Dalit Sena) को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले पशुपति ने लोजपा (LJP) को दो फाड़ कर दिया और भतीजे चिराग पासवान (Chirag Paswan) से आर-पार की लड़ाई छेड़ दी है.
पशुपति और चिराग के विवाद में टूटी पार्टी
रामविलास पासवान के निधन के बाद पशुपति पारस और चिराग पासवान के बीच विवाद खड़ा हो गया था. विवाद इतना गहरा था कि पार्टी दो फाड़ हो गई. पशुपति पारस 5 सांसदों के साथ अलग हो गए. पारिवारिक विवाद सड़क पर आ गया. पार्टी दफ्तर पर कब्जे के लिए भी जद्दोजहद का दौर चला. दोनों ओर से कार्यकर्ताओं के बीच लाठी-डंडे भी चले.
नीतीश से रही है नजदीकी
विधानसभा चुनाव के दौरान जब चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला तब पशुपति पारस ने चिराग पासवान का साथ नहीं दिया. वह चुनाव के दौरान साइलेंट मोड में रहे. नीतीश कुमार से नजदीकियों के चलते पशुपति पारस को राजनीति में कद और पद मिला. चिराग पासवान से विवाद के बाद पशुपति पारस खुलकर राजनीति के मैदान में बल्लेबाजी करने लगे. पशुपति पारस को नीतीश कुमार का समर्थन भी मिला.
कुशल संगठनकर्ता हैं पशुपति
पशुपति पारस ने 2009 के बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में हाजीपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए. इसके अलावा वो 5 बार विधायक भी रह चुके हैं. राजनीतिक विश्लेषक डॉ संजय कुमार मानते हैं कि पशुपति पारस की पहचान रामविलास पासवान को लेकर थी, लेकिन चिराग पासवान से विवाद के बाद वह सुर्खियों में आए. पशुपति पारस मृदुभाषी और कुशल संगठनकर्ता हैं. मृदुभाषी होने का फल भी उन्हें मिला. वह नीतीश कैबिनेट में मंत्री रहे. नीतीश कुमार के चहेते होने की वजह से संभव है कि उन्हें मोदी कैबिनेट में भी जगह मिल जाए.