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Wednesday, January 21, 2026

स्टडी का दावा- भारत में सेकेंडरी स्कूल लेवल पर स्कूल ड्रॉप आउट दर 17% से ज्यादा

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भारत में आज भी काफी बच्चे या तो शिक्षा से महरूम हैं या फिर आर्थिक परिस्थितियों की वजह से पढ़ाई पूरी होने से पहले ही स्कूल छोड़ देते हैं. सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में सेकेंडरी स्कूल लेवल पर स्कूल छोड़ने की दर 17% से अधिक है, जबकि अपर-प्राइमरी (VI से VIII) और प्राइमरी लेवल पर स्कूल छोड़ने की दर क्रमशः 1.8% और 1.5% है.
सेकेंडरी लेवल पर लड़कों में ड्रॉपआउट दर काफी ज्यादा है
वहीं सेकेंडरी लेवल पर लड़कों में ड्रॉपआउट दर काफी अधिक है, जबकि जूनियर कक्षाओं में इसका उल्टा है. गौरतलब है कि लेटेस्ट यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफोर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस या यूडीआईएसई + 2019-20 रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 30 प्रतिशत स्टूडेंट्स सेकेंडरी से सीनियर सेकेंडरी लेवल तक ट्रांजिशन नहीं करते हैं.
19 राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशो में सेकेंडरी लेवल पर ड्रॉप आउट सबसे ज्यादा
शहरीकृत दिल्ली में भी ड्रॉपआउट दर 20% से अधिक
गौरतलब है कि जहां उत्तर-पूर्व और पूर्वी क्षेत्रों के अधिकांश राज्यों में ड्रॉपआउट दर काफी ज्यादा है, तो वहीं शहरीकृत दिल्ली में भी ड्रॉपआउट दर 20% से अधिक है. पंजाब के साथ (1.5% की सबसे कम ड्रॉपआउट दर), 10% से कम ड्रॉपआउट दर वाले राज्य / केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ (9.5%), केरल (8%), मणिपुर (9.6%), तमिलनाडु (9.6%) और उत्तराखंड (9.8%) हैं.
लड़कियों का ड्रॉप आउट रेट लड़को से कम
तुलनात्मक रूप से ये सेकेंडरी लेवल पर हाईएस्ट प्रमोशन दर वाले राज्य/केंद्र शासित प्रदेश भी हैं जिनमें पंजाब, मणिपुर और केरल में 90% से अधिक प्रमोशन रेट हैं. लड़कियों की कुल स्कूल छोड़ने की दर लड़कों की तुलना में 2% कम है. पंजाब ने लड़कियों के लिए ड्रॉपआउट दर शून्य दर्ज की है जबकि असम ने माध्यमिक स्तर पर उच्चतम ड्रॉपआउट दर (35.2) दर्ज की है.
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