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Wednesday, January 21, 2026

गांव में लगाए गए BJP नेताओं के प्रवेश पर रोक के पम्पलेट, विधानसभा चुनावों के बहिष्कार का भी फैसला

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ग्रेटर नोएडा के जेवर विधानसभा के एक गांव में घर घर पर पम्पलेट लगें हुए है जिनपर लिखा है “गांव में किसी भी भाजपा (BJP) नेता और कार्यकर्ता के आने पर रोक है”. इसके अलावा कुछ पंपलेट पर लिखा है कि “मुकदमे वापस नहीं हुए तो करेंगे चुनावो का बहिष्कार”. इस तरह के पम्पलेट पूरे गांव में घर घर पर लगे हुए हैं. जिनको की गांव वालों ने पंचायत करके लगाया है. इस तरह की वीडियो वायरल हो रही है.
दरसल, पूरा मामला जेवर विधानसभा के रबूपुरा थाना क्षेत्र के आछेपुर गांव का है, जहां ग्रामीणों ने एक पंचायत की और पंचायत में फैसला किया कि अगर उनपर दर्ज मुकदमे वापस नहीं हुए तो वो चुनावों का बहिष्कार करेंगे और गांव में किसी भी बीजेपी नेता और कार्यकर्ता को प्रवेश नहीं करने देंगे. इसके लिए बकायदा उन्होंने पम्पलेट छपवाए और उनको पूरे गांव में घर घर और गांव के प्रवेश मार्गों पर लगाया गया.
ग्रामीणों के गुस्से कारण ये है कि बीते 2 अगस्त  को गांव की एक महिला पूनम (28 साल) की  रबूपुरा में एक निजी अस्पताल में ऑपेरशन के दौरान मौत हो गयी थी. जिसपर परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया था और डॉक्टर के खिलाफ लिखित में शिकायत थाने में दी थी. जिसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था लेकिन लिखित शिकायत के बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं किया गया था, जिसको लेकर ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया और वो 3 अगस्त को शव को रबूपुरा गोलचक्कर पर रखकर धरने पर बैठ गए थे. लोगों का आरोप है कि करीब 4 घण्टे धरने पर बैठने के बाद आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था. जिसके बाद लोगों ने धरना समाप्त कर दिया था. अब लोगों का आरोप है कि पुलिस ने उल्टा उन्हीं लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया है. धरना देने पर रबूपुरा कोतवाली में 31 नामजद व 50 से 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ बलवा, सड़क जाम व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. इसके बाद लोगों का गुस्सा भड़क गया और उन्होंने पंचायत का आह्वान किया.
पुलिस आरोपियों को बचाना चाह रही है- पीड़ित
पीड़ित सुरेंद्र भाटी ने कहा कि पुलिस आरोपियों को बचाना चाह रही है. अस्पताल की लापरवाही के चलते उनके परिवार के एक सदस्य की जान चली गयी, जिसके न्याय के लिए उन्होंने शांतिपूर्ण धरना दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपियों को पकड़ने की बजाय पुलिस उल्टा उन्हीं पर फैसले के लिए दबाब बना रही है. फैसले के लिए मना करने पर लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया गया है. इन लोगों ने मुकदमा दर्ज होने के विरोध में एक पंचायत का आह्वान किया और पंचायत में पुलिस कर्मियों पर कार्यवाही की मांग की. इस मामले में ग्रामीण मुख्यमंत्री और अन्य पुलिस अधिकारियों से इस मामले में कार्यवाही की मांग कर चुके हैं. इन लोगों ने मुख्यमंत्री से शिकायत में कहा है कि स्थानीय पुलिस निर्दोष लोगों को फंसा रही है और आरोपियों को बचा रही है.
ग्रामीणों ने पंचायत में सर्वसम्मति से 11 लोगों की एक कमेटी बनाई है जो आगे की रणनीति पर कार्य करेगी. पंचायत में चेतावनी दी गयी कि अगर लोगों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं होंगे तो पूरा गांव चुनावों बहिष्कार करेगा. सभी लोगों ने धरनारत लोगों पर दर्ज हुए मुकदमे की निंदा की और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए. इस समय पूरे गांव में घर घर पर और गांव के मुख्य प्रवेश मार्गों पर पम्पलेट लगाए गए हैं. किसी पम्पलेट में चुनावों के बहिष्कार की बात लिखी गयी है तो किसी में भाजपा नेता और कार्यकर्ताओं के गांव में प्रवेश रोक की बात लिखी गयी है. इस समय गांव के लोगों में काफी रोष देखने को मिल रहा है.
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