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Wednesday, January 21, 2026

डेल्टा वेरिएंट पर फाइजर और मॉडर्ना वैक्सीन का असर कम, 91 प्रतिशत के मुकाबले सिर्फ 66 फीसदी ही प्रभावी

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मंगलवार को प्रकाशित अमेरिकी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (Study of US health workers ) के एक बड़े रिसर्च के अनुसार, फाइजर और मॉडर्ना का असर कोविड के नए वे रिएंट डेल्टा के खिलाफ 91 प्रतिशत से घटकर 66 प्रतिशत हो गई. दरअसल यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) इन दो टीकों के वास्तविक दुनिया में मानव शरीर पर प्रभाव की जांच कर रहा है. क्योंकि इन दो वैक्सीन को सबसे पहले फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा अधिकृत किया गया था.
रिसर्च में बताया गया कि फाइजर और मॉडर्ना वैक्सीन की छह राज्यों में हजारों श्रमिकों का साप्ताहिक रूप से और कोविड -19 लक्षणों की शुरुआत पर परीक्षण किया गया, जिससे शोधकर्ताओं को रोगसूचक (Symptomatic) और स्पर्शोन्मुख संक्रमण (Asymptomatic Infection) के खिलाफ प्रभावकारिता का अनुमान लगाने की अनुमति मिली. अध्य्यन में पाया गया कि वैक्सीन लिए गए व्यक्ति और वैक्सीन नहीं लिए गए व्यक्ति बीच संक्रमण की दर और उन्हें ट्रैक किए जाने की मात्रा को देखते हुए, 14 दिसंबर, 2020 से 10 अप्रैल, 2021 की प्रारंभिक अध्ययन अवधि में टीके की प्रभावशीलता 91 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया गया था. जिसका मतलब है कि मॉडर्ना के टीकों की दो खुराक लेने से कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा 91 प्रतिशत तक कम हो सकता है.
दोनों टीके लेने से लोग केवल 66 प्रतिशत तक सुरक्षित रह पाएंगे
वहीं 14 अगस्त तक चलने वाले हफ्तों के दौरान पाया गया कि फाइजर और मॉडर्ना वैक्सीन कोरोना के अल्ट्रा-संक्रामक डेल्टा संस्करण पर कम असर कर रहा है और इस वैक्सीन के दोनों टीके लेने से लोग केवल 66 प्रतिशत तक सुरक्षित रह पाएंगे. रिपोर्ट के लेखकों ने कहा कि अध्य्यन में उन्हे कई चेतावनी मिली जिनमें टीकों से सुरक्षा समय के साथ और भी कम हो सकती है.
वायरस की मात्रा 1,000 गुना ज्यादा
मालूम हो कि इस रिसर्च के अलावा भी पहले कई अध्ययनों में ये कहा जा चुका है कि कोरोना वैक्सीन डेल्टा प्लस संसकरण पर कम असर कर रहा है. जुलाई की शुरुआत में डेल्टा संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रमुख तनाव बन गया था. जर्नल वायरोलॉजिकल में हाल ही में प्रकाशित एक पेपर के अनुसार, 2020 में वायरस की पहली लहर के रोगियों की तुलना में डेल्टा वेरिएंट के रोगियों के पहले परीक्षणों में पाए जाने वाले वायरस की मात्रा 1,000 गुना अधिक थी, जिससे इसकी संक्रामकता बहुत बढ़ गई.
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