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Wednesday, January 21, 2026

बाबा विश्वनाथ का पूजन हुआ महंगा, मंदिर प्रशासन ने जारी की नई रेट लिस्ट

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वाराणसी: देश में तेजी से बढ़ रही महंगाई का असर अब पूजा-पाठ में भी पड़ने लगा है. तेजी से बढ़ रही महंगाई के दौर में बाबा काशी विश्वनाथ (Baba Kashi Vishwanath) के दरबार में दर्शन पूजन अब महंगा हो गया है. सावन के मौके पर दर्शन करने आए भक्तों को मंगला आरती से लेकर रात में होने वाली शयन आरती तक के लिए जेब ढीली करनी पड़ेगी. इसके लिए विश्वनाथ मंदिर प्रशासन (Vishwanath temple trust) ने नई रेट लिस्ट जारी की है जो सावन में मान्य होगी.
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील वर्मा की तरफ से अलग-अलग आरतियों की नई रेट लिस्ट जारी कर दी गई है. नई रेट लिस्ट के मुताबिक सावन पर मंगला आरती के लिए 350 रुपये की जगह अब आम दिनों में 700 रुपये और सावन के सोमवार पर 1500 रुपए का भुगतान करना होगा. वहीं सुगम दर्शन के लिए 300 रुपये की जगह 500 रुपये आम दिनों में और सावन के सोमवार पर 750 रुपये का भुगतान करना पड़ेगा. एक शास्त्रीय से रुद्राभिषेक के लिए 450 रुपये की जगह 700 रुपये और 5 शास्त्रियों से रुद्राभिषेक के लिए 1380 रुपये की जगह 2100 रुपये का भुगतान करना होगा. मध्याहन भोग आरती, सप्तर्षि आरती और शृंगार भोग आरती का शुल्क 180 रुपये से 200 रुपये ही किया गया है.
सावन सोमवार पर सन्यासी भोग के लिए 7500 रुपये, अखंड दीप के लिए 700 रुपये, रुद्राभिषेक 20 वर्षों के लिए 25000 रुपये, महामृत्युंजय जप 32 शास्त्री 1 दिन के लिए एक लाख रुपये और सात शास्त्री से 5 दिन में अनुष्ठान कराने के लिए 51 हजार रुपये मंदिर कोष में जमा कराने होंगे. सावन श्रृंगार के लिए 15 हजार रुपये और पूर्णिमा श्रृंगार के लिए 3700 रुपये का शुल्क देना होगा. वहीं चार अलग-अलग सोमवार को बाबा के अलग-अलग शृंगार भी होंगे. पहले सोमवार को शिव शृंगार, दूसरे सोमवार को शिव पार्वती शृंगार, तीसरे सोमवार को अर्धनारीश्वर शृंगार और चौथे सोमवार को रुद्राक्ष शृंगार किया जाएगा.
भगवान शिव का पवित्र महीना सावन (Sawan-2021) 25 जुलाई से शुरू होने वाला है. ऐसे में देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी में सावन को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं. सावन के हर सोमवार पर बाबा विश्वनाथ के स्पर्श दर्शन नहीं होंगे बल्कि सिर्फ झांकी दर्शन की व्यवस्था की जाएगी. भक्तों को मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश नहीं मिलेगा. श्रद्धालु बाहर से ही बाबा का दर्शन कर, वहां लगाए गए विशेष पात्र में जल या दूध अर्पित कर सकेंगे.
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