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Wednesday, January 21, 2026

उ.प्र.संगीत नाटक अकादमी में आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत संगीत कार्यक्रम

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  • ‘नित्य वन्दे मातरम् का गान होना चाहिए….’
लखनऊ। स्वाधीनता का जयघोष आज पखावज का नाद बनकर उभरा। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी ने आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत आयोजिन आॅललाइन कार्यक्रम में आज अयोध्या के युवा ताल वादकों कौषिकी झा व वैभव रामदास के युगल पखावज वादन में उत्साह भरे षास्त्रीय स्वर सुनने को मिले; वहीं पखावज वादन के उपरांत मऊ के सुगम संगीत गायक बृजेन्द्र त्रिपाठी ने भजन, गजल व गीत के जरिए भक्ति और देषभक्ति की अलख जगायी। अकादमी फेसबुक पेज पर कार्यक्रम का आनन्द बड़ी संख्या में लोगों ने लिया।
देश की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में कलाकारों का स्वागत करते हुए अकादमी के सचिव तरुणराज ने कहा कि शृंखला के कार्यक्रमों की भावना यह है कि हम उन सब क्रान्तिकारियों, किसान, मजदूर, साहित्यकारों-कलाकारों का पुण्य स्मरण करें जिन्होंने आजादी के लिए अपना सर्वस्व कुर्बान कर दिया।
कार्यक्रम का प्रारम्भ सुप्रसिद्ध पखवजी डा.रामषंकर दास उर्फ स्वामी पागलदास की परम्परा को आगे बढ़ाने वाले विजयराम दास के षिष्य द्वय कुमारी कौषिकी झा और वैभव रामदास ने गणेष परन- गणपति एकदन्त लम्बोदर कल त्रिषूल वैपुण्ड भाल लोचन विषाल…. के पखावज वादन से किया। क्रान्तिकारियों को नमन करने के साथ चैरी-चैरा घटना का उल्लेख करते हुए आगे दोनो प्रतिभावान कलाकारों ने पारम्परिक परनों, फरमाइषी, ताल परन, सुंदर शृंगार परन, रेला, हर-हर महादेव परन व हनुमत बीज कवच परन प्रस्तुत करते हुए अंत गुरुवंदना से किया। इन कलाकारों का साथ हारमोनियम पर पल्लवी ने दिया।
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए मऊ के बृजेन्द्र त्रिपाठी ने गोस्वामी तुलसीदास रचित भक्ति रचना- जननी मैं न जिऊं बिनु राम… का मधुर स्वरों में गायन करते हुए रामानुज भरत के राम वन गमन के पष्चात माता से हुए संवाद के भावों को जिया। यह रचना उनके पिता व गुरु गिरजा षंकर त्रिपाठी की स्वरबद्ध की हुई थी। इसी क्रम में उन्होंने अलग अंदाज में फारुख कैसर की गजल- रस्ते भर रो-रोकर हमसे पूछा पांव के छालों ने, बसती कितनी दूर बसा ली दिल में बसने वालों ने पेष की। यहां उनकी गायकी में अलंकारों की अदायगी भी खूबसूरत रही।
आगे उन्होंने देशभक्ति का जोश जगाते हुए गीत- देश के हर व्यक्ति में स्वाभिमान होना चाहिए, नित्य वंदे मातरम का गान होना चाहिए…. सुनाया। गायक के साथ तबले पर प्रेमचन्द ने उम्दा संगत की। अंत में कार्यक्रम का संचालन कर रही अकादमी की संगीत सर्वेक्षक रेनू श्रीवास्तव ने सभी कलाकारों व कार्यक्रम में षामिल दर्षकों-श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
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