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Wednesday, January 21, 2026

चुनाव आयोग अपनी निष्पक्षता बरकरार रखते हुए कराए दोबारा ब्लॉक प्रमुख चुनाव- अजय कुमार लल्लू

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लखनऊ: प्रदेश के 476 ब्लॉकों पर ब्लॉक प्रमुख के चुनाव को लेकर हुए मतदान में हिंसा की खबरें गंभीर चिंता का विषय है. प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा है कि नामांकन के दौरान प्रदेश के 52 से अधिक जनपदों में हुई हिंसा के बाद मतदान के दौरान तमाम जनपदों में सत्तापक्ष के उम्मीदवारों के समर्थन में गुंडागर्दी और प्रशासन की मिली भगत लोकतंत्र और संविधान की मूलभावना पर गहरा आघात है. ब्लॉक प्रमुख के चुनाव की घटनाओं को लेकर अजय कुमार लल्लू ने कहा कि चुनाव आयोग को अपनी निष्पक्षता बनाए रखने के लिए ब्लॉक प्रमुख के चुनाव को निरस्त कर दोबारा चुनाव कराए जाने चाहिए. शासन प्रशासन के संदिग्घ अधिकारियों की जांच कराकर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित कराई जानी चाहिए.
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की व्यवस्था, सत्ता के विकेन्द्रीकरण के द्वारा आम जनता को ताकतवर बनाने के लिए की गई थी, लेकिन पिछले 25 वर्षो में सत्ता के दुरूपयोग के द्वारा जिला पंचायत सदस्य एवं बीडीसी सदस्यों के संवैधानिक अधिकारों का हनन करते हुए जबरन उनके मताधिकार को लूटा जा रहा है.

‘भ्रष्ट अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई करे सरकार’

अजय कुमार लल्लू ने कहा कि ब्लॉक प्रमुख के नामांकन के दौरान हुई व्यापक हिंसा, नामांकन पत्रों की खरीद में बाधा एवं छीना-झपटी, अपहरण, गोलीबारी की घटनाएं लगभग पूरे प्रदेश में हुई थीं, इसके बावजूद नतदान के दौरान प्रशासन ने एक बार फिर सत्ता के इशारे पर घटनाओं को रोकने की गंभीर कोशिश नहीं की. नामांकन के बाद मकदान के दौरान अमरोहा, हमीरपुर, सिद्वार्थनगर, अयोध्या जनपदों में हिंसक झड़प हुईं. उन्नाव में टीवी पत्रकार द्वारा ब्लॉक प्रमुख चुनाव की धांधली की कवरेज के दौरान जिले के सीडीओ द्वारा स्थानीय नेता के साथ मिलकर पत्रकार की पिटाई बेहद गंभीर विषय है. उन्नाव की यह घटना प्रशासन की संलिप्तता उजागर करती है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार ने मांग करते हुए कहा कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए.
‘तीन सौ से ज्यादा ब्लॉक प्रमुखों को निर्विरोध निर्वाचित करवाना अराजक तानाशाही का परिणाम’
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा कि अलीगढ़ में बीजेपी नेताओं ने प्रशासन से भिड़कर चुनाव में धांधली करने का प्रयास किया. इसी तरीके की तमाम घटनाएं पूरे प्रदेश में हुई हैं, जिसमें गोली और बम के हमलों से चुनाव को रक्त रंजित किया जा रहा है. इटावा में पुलिस खुद हिंसा की शिकार हो गई, लेकिन अराजक तत्वों पर कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई, क्योंकि इस हिंसा में सत्तारूढ़ दल के विधायक और समर्थक शामिल थे. उत्तर प्रदेश की यह घटनाएं प्रदेश को शर्मसार करती हैं. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश में लगभग नौ मंत्रियों और 50 से अधिक सत्ता पक्ष के विधायकों के परिवारीजन और रिश्तेदार ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ रहे हैं. इन सीटों पर सत्ता का खुलेआम दुरुपयोग हुआ है. तीन सौ से ज्यादा ब्लॉक प्रमुखों को निर्विरोध निर्वाचित करवाना, ऐसी ही अराजक तानाशाही का परिणाम है.
‘चुनाव आयोग को बरकरार रखनी चाहिए निष्पक्षता’
इस चुनाव में हुई हिंसक घटनाएं जैसे महिलाओं का अपमान, अपहरण आदि घटनाएं बेहद गंभीर एवं चिंता का विषय है. इतने बड़े पैमाने पर हिंसा की घटनाएं बगैर प्रशासन की मिलीभगत और सत्ता के संरक्षण के संभव नहीं है. लखीमपुर में महिला के अपमान की घटना के बाद चंद छोटे पुलिस के अधिकारियों पर कार्रवाई करके सरकार अपने दामन को साफ करना चाहती है, लेकिन पूरे प्रदेश में हुई व्यापक हिंसा पर अगर मुख्यमंत्री गंभीर हैं तो तत्काल पुलिस के प्रदेश स्तरीय बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई करें. इस संपूर्ण घटनाक्रम पर चुनाव आयोग का मौन, उसकी निष्पक्षता एवं स्वायतता पर बड़े प्रश्न चिन्ह खड़ी करती हैं. चुनाव आयोग को अपनी निष्पक्षता बनाए रखने के लिए ब्लॉक प्रमुख के चुनाव को निरस्त कर दोबारा चुनाव कराए जाने चाहिए. शासन प्रशासन के संदिग्घ अधिकारियों की जांच कराकर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित कराई जानी चाहिए.
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