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Wednesday, January 21, 2026

अफगानिस्तान में बिगड़े हालात पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मॉस्को में जताई चिंता, बोले- क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा

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अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की वापसी के फैसले बाद अब वहां पर स्थिति दिनोंदिन बदतर होती जा रही है. तालिबानी फौज लगतार वहां के नए हिस्सों पर कब्जा करती जा रही है और अफगानिस्तान की सेना जान बचाने के लिए दूसरे देशों भाग रही है. अफगानिस्तान के इस बिगड़ते हुए हालात पर रूस दौरे पर गए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मॉस्कों में भारी चिंता व्यक्त की.
जयशंकर ने कहा कि अफगानिस्तान में स्थिति ने काफी ध्यान खींचा है क्योंकि उसका सीधा संबंध क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ है. हम ऐसा मानते हैं कि हम मानते हैं कि आज की तत्काल आवश्यकता वास्तव में हिंसा में कमी लाना है.
विदेश मंत्री ने आगे कहा कि अगर हमें अफगानिस्तान और उसके आसपास शांति देखना है तो यह महत्वपूर्ण है कि आर्थिक और सामाजिक तरक्की बनी रहे इसे सुनिश्चित करने के लिए भारत और रूस को एक साथ मिलकर काम करना होगा.
जयशंकर बोले- चीन भारत संबंधों क लेकर बहुत चिंता पैदा हुई
इससे पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि बीते एक साल से भारत-चीन संबंधों को लेकर बहुत चिंता उत्पन्न हुई है क्योंकि बीजिंग सीमा मुद्दे को लेकर समझौतों का पालन नहीं कर रहा है जिसकी वजह से द्विपक्षीय संबंधों की बुनियाद ‘‘गड़बड़ा’’ रही है.
मॉस्को में ‘प्राइमाकोव इंस्टीट्यूट ऑफ वर्ल्ड इकनॉमी ऐंड इंटरनेशनल रिलेशन्स’ में भारत और चीन के संबंधों के बारे में एक सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा, ‘‘मैं कहना चाहूंगा कि बीते चालीस साल से चीन के साथ हमारे संबंध बहुत ही स्थिर थे…चीन दूसरा सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार के रूप में उभर.’’ तीन दिवसीय दौरे पर आये जयशंकर ने आगे कहा, ‘‘लेकिन बीते एक वर्ष से, इस संबंध को लेकर बहुत चिंता उत्पन्न हुई क्योंकि हमारी सीमा को लेकर जो समझौते किये गये थे चीन ने उनका पालन नहीं किया.’’
उन्होंने कहा, ‘‘45 साल बाद, वास्तव में सीमा पर झड़प हुई और इसमें जवान मारे गये और किसी भी देश के लिए सीमा का तनावरहित होना, वहां पर शांति होना ही पड़ोसी के साथ संबंधों की बुनियाद होता है. इसीलिए बुनियाद गड़बड़ा गयी है और संबंध भी.’’
पिछले वर्ष मई माह की शुरुआत से पूर्वी लद्दाख में कई स्थानों पर भारत और चीन के बीच सैन्य गतिरोध बना. कई दौर की सैन्य और राजनयिक बातचीत के बाद फरवरी में दोनों ही पक्षों ने पैंगांग झील के उत्तर और दक्षिण तटों से अपने सैनिक और हथियार पीछे हटा लिये. विवाद के स्थलों से सैनिकों को वापस बुलाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों के बीच अभी वार्ता चल रही है.
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