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Wednesday, January 21, 2026

नारायण राणे को मंत्री बनाकर, बीजेपी ने एक तीर से किए हैं कई शिकार

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महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य नारायण राणे को भी मोदी कैबिनेट में जगह मिली है. शिवसेना से लेकर कांग्रेस और फिर अपनी पार्टी बनाने के बाद बीजेपी के साथ आने वाले नारायण राणे महाराष्ट्र की राजनीति का बड़ा चेहरा हैं. महाराष्ट्र में भविष्य की तैयारियों को देखते हुए राणे को टीम मोदी में लेना बड़ा फैसला है.
एक तीर से कई शिकार
नारायण राणे कभी शिवसेना का बड़ा चेहरा थे लेकिन आज वो शिवसेना के सबसे बड़े विरोधियों में शुमार हैं. महाराष्ट्र में सरकार चला रही शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस को घेरने में राणे अहम भूमिका निभा सकते हैं. राणे एक बड़ा मराठी चेहरा हैं जो शिवसेना के सियासी समीकरण को सीधी टक्कर दे सकते हैं.
महाराष्ट्र में राणे का बड़ा जनाधार है जिसे देखते हुए ही उन्हें बीजेपी ने कमल थमाया था . अगले साल होने वाले बीएमसी चुनाव को देखते हुए भी उन्हें मंत्री बनाने का फैसला अहम है. बीएमसी पर पिछले दो दशक से ज्यादा वक्त से शिवसेना काबिज है. जहां राणे की भूमिका अहम हो जाती है. इसके अलावा बाहरियों को बीजेपी में सम्मान ना मिलने वालों को भी इस कदम से जवाब देने की कोशिश है.
नारायण राणे का सियासी सफर
1952 में पैदा हुए नारायण राणे 70 के दशक के दौरान ही सियासी दंगल में कूद गए थे. शुरुआत शिव सेना से की और बंबई में चेंबूर के शाखा प्रमुख बने. उसके बाद पार्षद, विधायक, नेता विपक्ष और मंत्री से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे.
2004 में शिवसेना छोड़ने के बाद राणे ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया. महाराष्ट्र में कांग्रेस सरकार में भी वो कैबिनेट मंत्री बनते रहे लेकिन सितंबर 2017 में उन्होंने कांग्रेस का हाथ छोड़कर महाराष्ट्र स्वाभिमान पक्ष नाम की पार्टी बनाई. एक साल बाद बीजेपी को समर्थन दिया और 2018 में राज्यसभा पहुंच गए. 15 अक्टूबर 2019 को महाराष्ट्र स्वाभिमान पक्ष का बीजेपी में विलय कर दिया.
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