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Wednesday, January 21, 2026

चिराग पासवान बोले- LJP से निष्कासित हैं पशुपति पारस, उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करने पर पार्टी का कड़ा ऐतराज

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पटना: केंद्रीय मंत्रिमंडल का आज शाम विस्तार होना है. लोकसभा चुनाव 2019 के बाद हुए मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद आज फिर से नए कैबिनेट का गठन किया जाएगा. नए कैबिनेट में एलजेपी कोटा से हाजीपुर सांसद पशुपति पारस का शामिल होना लगभग तय माना जा रहा है. हालांकि, जमुई सांसद चिराग पासवान को इस बात पर आपत्ति है. उनका कहना है कि पशुपति पारस पार्टी से निष्कासित किए जा चुके हैं. ऐसे में उन्हें एलजेपी कोटा से मंत्री बनाए जाने का पार्टी कड़ा विरोध करती है.
एलजेपी का हिस्सा नहीं पशुपति पारस
मंत्रिमंडल के विस्तार से चंद घंटों पहले उन्होंने ट्वीट कर कहा, ” पार्टी विरोधी और शीर्ष नेतृत्व को धोखा देने के कारण लोक जनशक्ति पार्टी से पशुपति कुमार पारस को पहले ही पार्टी से निष्काषित किया जा चुका है और अब उन्हें केंद्रीय मंत्री मंडल में शामिल करने पर पार्टी कड़ा ऐतराज दर्ज कराती है.”

चिराग पासवान ने कहा, ” प्रधानमंत्री के इस अधिकार का पूर्ण सम्मान है कि वे अपनी टीम में किसे शामिल करते हैं और किसे नहीं. लेकिन जहां तक एलजेपी का सवाल है पारस हमारे दल के सदस्य नहीं हैं. पार्टी को तोड़ने जैसे कार्यों को देखते हुए उन्हें मंत्री, उनके गुट से बनाया जाए तो LJP का कोई लेना देना नहीं है.”

उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष द्वारा पार्टी से निकाले गए सांसदों में से पशुपति पारस जी को नेता सदन मानने के बाद लोक जनशक्ति पार्टी ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष उनके फैसले पर फिर से विचार याचिका दी थी जो अभी भी विचाराधीन है. लोक जनशक्ति पार्टी ने आज लोकसभा अध्यक्ष के प्रारम्भिक फैसले जिसमें पार्टी से निष्कासित सांसद पशुपति पारस को लोजपा का नेता सदन माना था के फ़ैसले के ख़िलाफ़ आज दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की गई है.
कोर्ट जाने की कही थी बात
मालूम हो कि चिराग शुरू से ही चाचा पशुपति पारस को एलजेपी कोटा से मंत्री बनाए जाने पर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. चिराग पासवान ने मंगलवार को पटना स्थित अपने आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था, ” मेरी अनुमति के बिना एलजेपी से निष्कासित सांसद पशुपति पारस को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया, तो मैं कोर्ट जाऊंगा. क्योंकि पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष मैं हूं और पार्टी भी मेरी है.”
चिराग ने कहा था, ” चाचा और बागियों ने रामविलास के विचारों को कुचला है. राष्ट्रीय कार्यकारिणी में कुल 75 सदस्य हैं. इसमें 66 सदस्य हमारे साथ हैं. सबके ऐफिडेविट भी हैं. पशुपति कुमार पारस ने पटना में खुद को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर तो दिया, लेकिन इस बारे में चुनाव आयोग में कोई क्लेम नहीं किया और ना ही खुद को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बताया. मैं चुनौती देता हूं कि वो मुझे गलत साबित करें. मैं चुनाव आयोग और कोर्ट, दोनों जगहों पर चुनौती दे सकता हूं.”
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