कानपुर। अक्सर देखा गया है कि मरीजो को वार्ड तक ले जाने के लिए काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। कभी स्ट्रेचर नहीं तो कभी रास्ते के लिए ऑक्सीजन नहीं। इस समस्या के समाधान के लिए मेडिकल कॉलेज से संम्बंध हैलेट हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने ई रिक्शा को ऐसा डिजाइन किया कि उसे एम्बुलेंस बना दिया। इस एम्बुलेंस में मरीज के लिए स्ट्रेचर, तीमारदार के बैठने की व्यवस्था के साथ-साथ ऑक्सीजन भी होगी। मरीज को एक वार्ड से दूसरे वार्ड में शिफ्ट करने, हैलेट से ह्रदय रोग संस्थान, चेस्ट, कैन्सर , जे एल रोहतगी हॉस्पिटल जाने के लिए मरीज इस ई एम्बुलेंस की मदद लेंगे। मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल ने बताए कि इस एम्बुलेंस का यूज़ करने पर कोई शुल्क नहीं लिया जायेगा। इस महीने दो और एम्बुलेंस के अलावा 5 एम्बुलेंस का लक्षय है।फंडिंग और डिजाइन डॉक्टरों ने की है। यह ई-एम्बुलेंस प्रदेश की पहली एम्बुलेंस है।
शुरू की गयी इस सेवा के शुरआत में सिर्फ सीरियस मरीज़ों को इमरजेंसी से वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा। इन एम्बुलेंस से हैलट के बगल में बने चेस्ट अस्पताल, कैंसर अस्पताल व ह्रदयरोग संस्थान में मरीजों को शिफ्ट करने में भी कोई दिक्कत नहीं आएगी। अब तक मरीजों को हैलट से किसी अन्य अस्पताल में शिफ्ट करने के लिए दो से तीन हजार रुपए निजी एम्बुलेंस वाले वसूलते थे। लेकिन इस सेवा से मरीजों को काफी आराम हो जायेगा। आपको बता दें किसी डॉक्टर द्वारा डिज़ाइन की गयी और साथ ही डॉक्टर के फंड से बानी यह प्रदेश की पहली एम्बुलेंस सेवा है। डॉ यशवंत राव ने बताया, हम लोगों ने कोरोना काल में कई ऐसे मरीजों को देखा जिन्हें एम्बुलेंस न मिलने की वजह से दम तोडा दिया। तब मेरे ख्याल में यह आया कि अगर कोई छोटी एम्बुलेंस होती जो मरीजों को ह्रदयरोग संस्थान तक पहुंचा सके तो कई मरीजों की जान बचाई जा सकती थी।
यह सुविधा से मरीजों के लिए ई-एम्बुलेंस लगाई जा रही है। ई- एम्बुलेंस वार्डों के अंदर तक जा सकती है। यह बैटरी से चलने वाली एक स्ट्रेचर के साइज की एम्बुलेंस होगी। फिलहाल इस समय एक एम्बुलेंस का तैयार हो कर हैलट आचुकी है अभी और 6 एम्बुलेंस आने बाकी है। जीएसवीएम के प्राचार्य डॉ संजय काला ने बताया, हैलट अस्पताल का परिसर बड़ा होने के कारण यहां पर भर्ती मरीजों को एक वार्ड से दूसरे या मरीजों की जांच के लिए वार्डों से एक्सरे सीटी स्कैन और एमआरआई जांचों के लिए सेंटरों तक भी लाया जा सकेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि इससे मरीजों को समय से स्ट्रेचर न मिलने की समस्या का भी समाधान हो सकता है। इससे पहले मरीजों को ले जाने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता था, इसी को देखते हुए ई-एम्बुलेंस की सुविधा शुरू करने की योजना बनाई गयी थी।