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Wednesday, January 21, 2026

सावन महीने में भगवान शिव की ही आराधना क्यों?

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डॉ.भरत राज सिंह

शास्त्रों में कहा गया है कि सावन का महीना भगवान शिव का महीना होता है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस महीने में भगवान विष्णु पाताल लोक में रहते हैं, इसी वजह से इस महीने में भगवान शिव ही पालनकर्ता होते हैं और वहीं भगवान विष्णु के भी कामों को देखते हैं, यानि सावन के महीने में त्रिदेवों की सारी शक्तियां भगवान शिव के पास ही होती हैं। शिव को देवों का देव महादेव कहा जाता है। वेदों में इन्हें रूद्र नाम से पुकारा गया है। अब आपको कुछ ऐसे काम बताते है, जिन्हें सावन में करने से भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं-
• सावन के महीने में शिवलिंग की पूजा की जाती है लिंग सृष्टि का आधार है और शिव विश्व कल्याण के देवता है।
• शिवलिंग से दक्षिण दिशा में ही बैठकर पूजन करने से मनोकामना पूर्ण होती है।
• शिवलिंग पूजा में दक्षिणा दिशा में बैठकर करके साथ में भक्त को भस्म का त्रिपुण्ड लगाना चाहिए, रूद्राक्ष की माला पहननी चाहिए और बिना कटेफटे हुये बिल्वपत्र अर्पित करना चाहिए।
• शिवलिंग की कभी पूरी परिक्रमा नहीं करनी चाहिए। आधी परिक्रमा करना ही शुभ होता है।
सावन में शिवपूजा का वैज्ञानिक पहलू
डॉ.भरत सिंह महानिदेशक, स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज, लखनऊ व वैदिक विज्ञान केन्द्र के प्रभारी का कहना है कि शिव ब्रह्ममाण्ड की शक्ति के ध्योतक है। शिव लिंग काले पत्थर का ही होता है, जो वातावरण व ब्रह्माण्ड से ऊर्जा अवशोषित करता रहता है। इस ऊर्जा को पूर्ण रूप से शिवलिंग में समाहित करने के लिए इसको साफ सुथरा रखने व जल, दूध आदि से अभिषेक करने की प्रथा हैं, जिससे पूजा अर्चना के समय आप को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त हो और प्रदूषित, नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाएं।
सावन का महीना ऐसा होता है जब बरसात से मौसम का एक माह से ज्यादा समय गुजर चुका होता है, उसके बाद मौसम में नमी व काफी सुहावनापन आ जाता है। बरसात के मौसम में शुरु के एक महीने में वातावरण में मौजूद विषाक्त गैसे धरती पर पानी के कणों के साथ आ जाती हैं और अक्सर स्त्रियों व बच्चों में त्वचा सम्बन्धी रोग उत्पन्न हो जाते हैं। इन रोगों को दूर करने हेतु ही सावन में औरतो द्वारा शिवलिंग पर अभिषेक (जल, दूध, घी, शहद आदि) से किया जाता है जिससे त्वचा रोग के जर्म व बैक्टेरिया आदि भी शिव लिंग में अवशोषित अथवा मरकर समाप्त हो जाते हैं और औरते निरोगी हो जाती हैं तथा शिवलिंग से अच्छी ऊर्जा ग्रहण करती हैं।
सावन के महीने में शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना से दांपत्य जीवन में प्रेम और तालमेल बढ़ता है। सावन माह में सम्पूर्ण वातावरण में पेड़-पौधों, खेतो, झाड़ियों व गार्डेन आदि में हरियाली आ जाती है, जिससे मनुष्यमात्र ही नहीं वरन जीव-जन्तुओं में भी प्रसन्नता बढ़ती है। सावन माह में औरते समूह में झूला भी झूलती हैं और आपस में गायन कराती है, जिससे उनमें प्रसन्नता बढ़ती है। शास्त्रों में अंकित है सावन के महीने में शिवलिंग की पूजा इसलिए की जाती है यह लिंग सृष्टि का आधार है और औरतो द्वारा इस माह में किया गया गर्भ धारण अतयन्त प्रभावशाली व व्यक्तित्व का धनी होना पाया गया है, क्योंकि शिव विश्व कल्याण के देवता है।
पुष्पपत्र अर्पण की विधि व फल
• विल्वपत्र चढ़ाने से जन्मान्तर के पापों व रोग से मुक्ति मिलती है।
• कमल पुष्प चढ़ाने से शान्ति व धन की प्राप्ति होती है।
• कुशा चढ़ाने से मुक्ति की प्राप्ति होती है।
• दूर्वा चढ़ाने से आयु में वृद्धि होती है।
• धतूरा अर्पित करने से पुत्र रत्न की प्राप्ति का पुत्र का सुख मिलता है।
• कनेर का पुष्प चढ़ाने से परिवार में कलह व रोग से निवृत्ति मिलती हैं।
• शमी पत्र चढ़ाने से पापों का नाश होता, शत्रुओं व शमन व भूतप्रेत बाधा से मुक्ति मिलती है।
शिवलिंग पूजा में वर्जित
शिव पूजा में किन वस्तुओं का उपयोग बिल्कुल वर्जित है…
• शिवलिंग पर कभी केतकी के फूल अर्पित नहीं करने चाहिए क्यों ब्रह्म देव के झूठ में उनका साथ देने के वजह से शिव ने केतकी के फूलों को श्राप दिया था।
• तुलसी पत्तों को शिवलिंग पर नहीं चढ़ना चाहिए, क्योंकि शिव द्वारा बृन्दा राक्षसी के पति जरासंध को न हरा पाने से विष्णु द्वारा उसका का वध हुआ था और वाद में बृन्दा से विवाह के लिए विष्णु ने शालीग्राम के रूप में जन्म लिया और एकादशी के दिन बृन्दा राक्षसी से जो तुलसी बनी विष्णु ने विवाह किया।
• नारियल तो ठीक है लेकिन शिवलिंग पर नारियल के पानी से अभिषेक नहीं करना चाहिए।
• हल्दी का सम्बन्ध स्त्री सुन्दरता से है इसलिए शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ानी चाहिए।
• भगवान शिव विनाशक हैं और सिंदूर जीवन का संकेत। इस वजह से शिव पूजा में सिंदूर उपयोग नहीं होता।
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