लखनऊ: राष्ट्रीय अदालत के तहत शनिवार को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 78 मुकदमे निपटाए तो वहीं अधीनस्थ अदालतों में कुल 20 हजार 199 मुकदमों का अंतिम रुप से निस्तारण हुआ. हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार लिस्टिंग डॉ. सत्यवान सिंह ने बताया कि जस्टिस रमेश सिन्हा की अध्यक्षता में आयोजित इस लोक अदालत में पक्षकारों को 2 करोड़ 54 लाख रुपये मुवावजा दिलाया गया.
अधीनस्थ अदालतों में कुल 30 करोड़ 21 लाख 47 हजार 504 रुपये की वसूली हुई. इनमें सिविल, चेक बाउंसिग, वैवाहिक वाद, मोटर वाहन दुर्घटना, सुखाधिकार, उत्तराधिकार, व्यादेश, राजस्व और आपराधिक मुकदमों में अंतिम रिपोर्ट दाखिल होने और साथ ही आपसी सुलह-समझौते से खत्म होने वाले फौजदारी के मामले भी शामिल थे. इन मुकदमों का निस्तारण वर्चुअल मोड से किया गया. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव फरहा जमील के मुताबिक लोक अदालत में आपसी सुलह-समझौते से फौजदारी के 9872 वादों का निस्तारण हुआ, जिसके अंतर्गत 12 लाख तीन हजार 975 रुपये जुर्माने के रुप में वसूल किए गए. सिविल और उत्तराधिकार के कुल 49 मामलों का अंतिम रुप से निपटारा हुआ, जिसमें तीन करोड़ 34 लाख 52 हजार 832 रुपए प्राप्त हुए.
मोटर दुर्घटना प्रतिकर के 84 मुकदमों का निस्तारण किया गया, जिसमें पक्षकारों को 4 करोड़ 60 लाख 78 हजार की धनराशि बतौर प्रतिकर दिलाई गई. 19 वैवाहिक वादों का निस्तारण भी हुआ. चेक बाउंस के 888 वादों का निस्तारण हुआ, जिसके तहत 13 करोड़ 2 लाख 96 हजार 466 रुपए की वसूली हुई. इस प्रकार लोक अदालत में रिकार्ड 11,546 लंबित वादों का निस्तारण विभिन्न अदालतों द्वारा किया गया.
इसके अतिरिक्त बैंक वसूली और फाइनेंस के प्री-लिटिगेशन स्तर पर 777 वादों का निस्तारण हुआ, जिसकी समझौता राशि 6 करोड़ 78 लाख 84 हजार 898 रुपए तय की गई. यूपी में पहली बार इस राष्ट्रीय लोक अदालत में ई-चालान के जरिए वादकारियों ने घर बैठे ऑनलाइन जुर्माना जमा किया और अपने मुकदमे का निस्तारण कराया. जिला जज सर्वेश कुमार, अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव जेके सिंह तथा नोडल अधिकारी और एडीजे अरविन्द मिश्र द्वारा इस दौरान सिविल कोर्ट परिसर का निरीक्षण किया गया. लोक अदालत में कोविड-19 गाइडलाइन का पूर्णतया पालन किया गया.