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Wednesday, January 21, 2026

रिवर फ्रंट घोटालाः छापेमारी में सीबीआई को 400 करोड़ से ज्यादा के गबन का पता चला, अधिकारियों ने रिश्तेदारों को दिये ठेके

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गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सोमवार को कई राज्यों के 40 स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान ठेकेदारों, राजनेताओं, पूर्व नौकरशाहों और उनके रिश्तेदारों के घरों से सोने की ईंटें, हीरे, फिक्स डिपाजिट की रसीदें, संपत्ति के दस्तावेजों के साथ-साथ नकदी भी बरामद की गई। 2012 से 2017 के बीच समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान लखनऊ में गोमती रिवरफ्रंट परियोजना में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में हुई छापेमारी के बारे में मंगलवार को सीबीआई ने जानकारी दी।
छापेमारी में अब तक 400 करोड़ से अधिक के गबन का पता चला है। अधिकारियों ने दावा किया कि प्रशासनिक अधिकारियों ने जिन ठेकेदारों और निजी फर्मों को निर्माण कार्य आवंटित किया उन लोगों ने मिलकर यह गबन किया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि केवल नकदी और कीमती सामान और संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज जब्त किए गए हैं। आरोपितों को सोने और हीरे की खरीद से संबंधित सबूत पेश करने के लिए कहा गया है।
सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि प्राथमिकी में नामजद सिंचाई विभाग के पांच इंजीनियरों के घरों से 75 लाख रुपये से अधिक नकद बरामद किया गया है। उन्होंने कहा कि मेरठ में एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी के रिश्तेदार के घर से एक करोड़ की फिक्स डिपाजिट, हीरे और सोने की ईटें बरामद की गईं। उन्होंने कहा कि पूर्व आईएएस अधिकारी के रिश्तेदार ने एक निजी फर्म के माध्यम से परियोजना में काम किया था।
अधिकारी ने कहा कि सीबीआई ने गोरखपुर में एक राजनेता के घर से करीब 5 लाख रुपये नकद और कई संपत्तियों के दस्तावेज बरामद किए हैं। उन्होंने कहा कि राजनेता और उनका परिवार उस कमाई का जरिया बताने में विफल रहा। उन्होंने कहा कि इटावा में एक ठेकेदार पुनीत अग्रवाल के घर को सील कर दिया गया। सीबीआई के अधिकारियों ने उनसे कई घंटों तक पूछताछ की है।
यूपी के साथ राजस्थान और बंगाल में छापेमारी
सीबीआई द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार यूपी में लखनऊ, सीतापुर, रायबरेली, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, अलीगढ़, गोरखपुर, आगरा, बुलंदशहर, एटा, मुरादाबाद, मेरठ, इटावा में छापे मारे गए। इसके अलवा अलवर (राजस्थान) और कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में तत्कालीन मुख्य अभियंता, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, तत्कालीन कार्यकारी अभियंता, तत्कालीन सहायक अभियंता और निजी ठेकेदार, फर्म और कंपनियां शामिल हैं।
189 लोगों के खिलाफ नई एफआईआर
सीबीआई की लखनऊ इकाई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीडब्ल्यू) ने 189 लोगों के खिलाफ शुक्रवार को एक नई प्राथमिकी दर्ज करने के बाद छापेमारी की। प्राथमिकी में सरकारी अधिकारियों और निर्माण इकाइयों के प्रबंधकों के नाम है।
योगी की सरकार बनते ही 2017 में सीबीआई को दी गई जांच
योगी आदित्यनाथ की सरकार ने जुलाई 2017 में राज्य के सिंचाई विभाग द्वारा गोमती नदी चैनलीकरण परियोजना और गोमती रिवरफ्रंट विकास परियोजना में अनियमितताओं की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। सीबीआई ने नवंबर 2017 में इस मामले को अपने हाथ में लिया था। सीबीआई ने इस मामले में दिसंबर 2017 में पहली प्राथमिकी दर्ज की थी। उक्त प्राथमिकी एक समिति की सिफारिश के आधार पर दर्ज की गई थी, जिसने अनियमितताओं के लिए दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई का सुझाव दिया था।
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