लखनऊ: पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) की फंडिंग पर हो रहे धर्मांतरण के मामले में (Religious Conversion Case) जांच के दौरान ATS को PFI कनेक्शन मिला है. इस मामले में CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान कानपुर में हुए दंगे के मामले में जेल गए अनवरगंज कुरियाना निवासी मौलाना समेत पांच मौलाना ATS के रडार पर हैं. ये पांचों मौलाना पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के सदस्य हैं. दो साल पहले नागरिकता संशोधन कानून ( Citizenship Amendment Law) के विरोध में इन्हीं के इशारे पर कानपुर में भीषण हिंसा हुई थी.
धर्मांतरण के जाल में फंसकर हिन्दू से मुसलमान बने छात्र कानपुर के काकादेव निवासी आदित्य गुप्ता ने इस मामले में एटीएस को अहम जानकारियां दी हैं. ATS की मानें तो नोएडा जाने से पहले कानपुर के अनवरगंज कुरियाना निवासी मौलाना वासिफ ने आदित्य से संपर्क किया था. इसके बाद मौलाना ने आदित्य को कई महीने तक इस्लाम से जुड़ी जानकारियां दीं, और फिर उसे हलीम मुस्लिम कॉलेज ले जाना शुरू किया. जहां आदित्य को मुस्लिम धर्म से जुड़े लिटरेचर पढ़ाए गए. इसके बाद मौलाना वासिफ की मदद से ही उसका दाखिला बिठूर के ज्योति मूक बधिर स्कूल में हुआ. यहां भी वह अक्सर उसके पास आता रहता था. लंबे समय तक ब्रेन वास करने के बाद उस मौलाना वासिफ ने आदित्य का दाखिला नोएडा के डेफ सोसाइटी में कराने के साथ ही उसे मौलाना उमर गौतम से मिलाया.
हिंसा भड़काने के लिए जुटा रहे थे फंड
फरवरी 2019 में सीएम योगी की गंगा यात्रा के दौरान दंगा कराने की साजिश रचते हुए गिरफ्तार कर लिया गया था. सीएम योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम में हिंसा कराने के लिए इन्होंने हलीम मुस्लिम कॉलेज और बेगमपुरवा में एक काजी के घर में बैठक भी की थी. जिसमें प्रदेश के बाहर के मुस्लिम युवकों को बुलाया गया था और उन्हें दंगा करने के लिए रूपये बांटे जा रहे थे. लेकिन, आईबी को इसकी भनक लग गयी और पांचों आरोपियों को बाबूपुरवा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में आरोपियों कुबूल किया कि पीएफआई के पदाधिकारी हैं और उन्हें यूपी में हिंसा कराने के लिए फंड जुटाने की जिम्मेदारी दी गयी थी. इसके लिए केरल में पीएफआई की बड़ी बैठक हुई थी.
आपत्तिजनक वीडियो दिखाकर तैयार की थी हिंसा की जमीन
ATS ने बताया कि मोहम्मद उमर एक मदरसे का मौलाना और वासिफ खुद को पत्रकार बताता था. वासिफ नागरिकता संशोधन कानून को लेकर दुनिया भर के माहौल की जानकारी देता था. एक रिटायर्ड मौलाना और उमर तकरीरों के दौरान मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार की वीडियो दिखाकर युवाओं को दंगा करने के लिए तैयार करते थे. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में सबसे ज्यादा हिंसा कानपुर में हुई थी. 20 दिसम्बर 2019 को चमनगंज के यतीमखाना से भड़की हिंसा ने दूसरे दिन बिकराल रूप ले लिया. 21 दिसम्बर को बाबूपुरवा में आगजनी तोड़फोड़ के बीच दंगाइयों ने गोलीबारी की और पेट्रोल बम चलाये. इसमें कई पुलिस वाले घायल हुए थे. हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को गोलियां तक चलानी पड़ीं थी. जिसमें 4 युवकों की मौत हो गयी थी, जबकि 13 दंगाई पुलिस की गोली से घायल हुए थे. इस घटना के बाद स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने हिंसा भड़काने वालों की तलाश शुरू की तो पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के पांच सदस्यों का नाम सामने आया.
SDPI के खाते में विदेशों से आया था फंड
गिरफ्तार मौलानाओं को जेल भेजने के बाद पुलिस ने इनकी फंडिंग का स्रोत तलाशना शुरू किया. काफी छानबीन के बाद पता चला कि पीएफआई फंडिंग के लिए अपनी धार्मिक और राजनीतिक शाखा सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) का इस्तेमाल कर रही है. इसके बाद पांचों आरोपियों को रिमांड पर लेकर फिर से छानबीन की गई. एसडीपीआई के कई खातों में 130 करोड़ रुपये का विदेशी ट्रांजेक्शन मिला था. इसमे ज्यादातर फंडिंग ISI ने की थी.
जमानत पर रिहा हुए पांचों सदस्यों की ATS कर रही निगरानी



