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Wednesday, January 21, 2026

जानिए किन राज्‍यों में होता है बेटों से ज्यादा बेटियों का जन्म, Sex ratio में हो रहा सुधार

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सेक्स  रेशियो की स्थिति को लेकर भारत में हमेशा ही चिंता बनी रहती है और इस दौरान भी देश में जन्म के समय सेक्स  रेशियो की स्थिति में कुछ ज्यादा परिवर्तन देखने को नहीं मिला है। टीओआई में छपी एक खबर के मुताबिक, साल 2019 के बर्थ और मृत्‍यु पंजीकरणों की बात की जाए तो इसकी आपको एक मिलती-जुलती तस्वीर नजर आएगी। डेटा 2019 की सिविल रजिस्‍ट्रेशन सिस्‍टम की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों के सेक्स  रेशियो डेटा उपलब्ध है जो बताते है कि किसी में SRB (Sex Ration Birth) 900 से कम नहीं है। वहीं कई राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों में साल 2018 या 2017 की तुलना में कम लिंगानुपात दर्ज किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, ऐसे कई राज्य जहां पहले लिंगानुपात में कमी थी वहां अब साकारात्मक सकेंत देखने को मिल रहे है। असम राज्य में साल 2017 में लिंगानुपात जहां 921 था वहीं अब 2 साल के मुकाबले में यह घटकर 903 पर पहुंच गया है। माना जाता है कि जनजातीय समुदाय में बाकियों के मुकाबले लिंगानुपात सही रहता है लेकिन छत्तीसगढ़ जैसे जनजातीय राज्य में भी SRB में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली है। साल 2017 में जहां लिंगानुपात 968 था वहीं अब घटकर 931 तक पहुंच गया है।
किस राज्य में सबसे ज्यादा उछाल?
आपको बता दें कि तेलंगाना राज्य में SRB का सबसे ज्यादा उछाल देखा गया है। इस दौरान इस राज्य का लिंगानुपात 915 से 953 पर पहुंच गया है। वहीं उत्तराखंड में भी लिंगानुपात 929 से बढ़कर 960 पर दर्ज किया गया है। टीओआई में छपी खबर के अनुसार, भारत के केवल 6 राज्य ऐसे है जहां लिंगानुपात 952 से अधिक हैं। इन 6 में 3 राज्य पूर्वोत्‍तर में आते हैं।
यह है 6 राज्य का लिंगानुपात!
अरुणाचल प्रदेश का लिंगानुपात- 1024, साल 2017 में था 1047,
नगालैंड में लिंगानुपात 1001,
मिजोरम में 975,
केरल  2019 में लिंगानुपात 960 पाया गया,  2017 में था 965 सेक्स  रेशियो,
तेलंगाना  953 और
 उत्तराखंड 960
लिंग के आधार पर
गर्भपात की संख्या में पंजाब और चंडीगढ़ में सुधार देखने को मिला है। इसके अलावा ओडिशा का SRB 930 से बढ़कर 947 हो गया है। वहीं बात करें दिल्‍ली की तो 2019 का डेटा न उपलब्‍ध होने के कारण साल 2017-18 के बीच का ही लिंगानुपात पता चल पाया जिसके मुताबिक इन दो सालों में काफी सुधार देखने को मिले है।
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