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Wednesday, January 21, 2026

चुनाव आयोग से मिलने के बाद बोले चिराग, मैं ही पार्टी प्रेसिडेंट, बंद कमरे में अध्यक्ष का चुनाव नहीं होता

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दिवंगत दिग्गज नेता रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) में पड़ी फूट लगातार और गहरी होती जा रही है। चाचा-भतीजा के बीच सियासी शह औऱ मात के खेल के साथ ही इमोशनल दांव भी चल रहा है। आज चिराग पासवान ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की है। जिसके बारे में खुद बताते हुए चिराग ने कहा कि आज लोजपा के 5 सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात की। हमने आयोग के सामने अपनी बातें रखी। हमने उनके संज्ञान में दिया कि 2019 में लोजपा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव हुआ और मुझे ज़िम्मेदारी दी गई, हर 5 साल में राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होता है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को पार्टी से निलंबित किया गया है जिसमें 5 सांसद, 2 प्रदेश अध्यक्ष, 1 राष्ट्रीय महासचिव, 1 हमारी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। ये लोग कहीं न कहीं पार्टी के नाम पर दावा करने का प्रयास कर रहे हैं। इसलिए हम चुनाव आयोग के सामने आए। पशुपति पारस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मेरा निर्वाचन केवल सर्वसम्मति से हुआ है। लोजपा के राष्टीय अध्यक्ष के निर्वाचन के लिए मुझे रिटर्निंग अधिकारी के द्वारा चिट्ठी मिली है। जिसे आज हम चुनाव आयोग के दफ़्तर में जमा कर देंगे।
पासवान परिवार में दरार
बता दें कि 28 नवंबर, 2000 को लोजपा बनी थी। रामविलास पासवान के निधन के बाद चिराग को पुत्र होने का फायदा मिला। विधानसभा चुनाव के दौरान चिराग ने खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान बताया था। लेकिन एनडीए से बाहर निकलकर बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर उनके चाचा पशुपति कुमार पारस नाराज थे। बाद में लोजपा सांसद पशुपति कुमार पारस, चौधरी महबूब अली कैसर, वीणा सिंह, चंदन सिंह और प्रिंसराज की चिराग पासवान से राहें अलग हो गई हैं और फिर चिराग को हटा पारस को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया।
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