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Wednesday, January 21, 2026

कानूनी सुरक्षा चाहिए तो करें देश के नियमों का पालन, ट्विटर को रविशकंर प्रसाद की सलाह

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नई दिल्ली : माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर ने भारत में एक मध्यस्थ मंच (Intermediary Platform) का दर्जा खो दिया है क्योंकि उसने अब तक नए आईटी नियमों का अनुपालन नहीं किया है.
केंद्रीय संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को ट्वीट की एक श्रृंखला जारी कर बताया कि कई सवाल उठ रहे हैं कि क्या ट्वीटर सुरक्षित प्रावधान पाने का हकदार है. हालांकि इस मामले में साधारण तथ्य यह है कि ट्विटर 26 मई को लागू हुए मध्यवर्ती दिशानिर्देशों का पालन करने में विफल रहा है.
उन्होंने कहा कि ट्विटर को नए आईटी नियमों का अनुपालन करने के लिए कई अवसर दिए गए थे. हालांकि, इसने जानबूझकर गैर-अनुपालन का रास्ता चुना है.
फेक न्यूज के रोकथाम में विफल
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति अपने विशाल भू-भाग की तरह विस्तृत है. कुछ मामलों में ‘फेक न्यूज’ की एक छोटी सी चिंगारी भी आग बन सकती है. सोशल मीडिया के प्रसार से इसकी संभावना बढ़ जाती है. मध्यस्थता दिशा-निर्देशों में यह आवश्यक रूप से शामिल था.
यह आश्चर्यजनक है कि ट्विटर जो खुद को स्वतंत्र भाषण के ध्वजवाहक के रूप में चित्रित करता है, जब वह मध्यस्थ दिशानिर्देशों की बात करता है तो जानबूझकर अवज्ञा का रास्ता चुनता है. इसके साथ ही चौंकाने वाली बात यह है कि ट्विटर भारत के कानून के तहत उपयोगकर्ताओं की शिकायतों को दूर करने में विफल रहता है. इसके अतिरिक्त यह फेक मीडिया को फ्लैग करने की अपनी नीति का मनमाने तौर पर उपयोग तभी करता है.
यूपी में जो हुआ वह फर्जी खबरों से लड़ने में ट्विटर की मनमानी का उदाहरण था. जहां एक और ट्विटर फेक न्यूज के मामले में अपने तंत्र को लेकर उत्साही रहा है, यूपी जैसे अन्य मामलों में इसकी विफलता हैरान करती है. जो फेक न्यूज से लड़ने की इसकी मंशा पर सवाल उठाता है.
सभी को करना होगा देश के कानून का पालन
ट्विटर के भारतीय कानूनों की अनदेखी पर उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियां चाहे वह फार्मा, आईटी, या अन्य जो संयुक्त राज्य अमेरिका या अन्य विदेशी देशों में व्यापार करने जाती हैं, स्वेच्छा से स्थानीय कानूनों का पालन करती हैं. फिर ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म दुर्व्यवहार और दुरुपयोग के शिकार लोगों को आवाज देने के लिए बनाए गए भारतीय कानूनों का पालन करने में अनिच्छा क्यों दिखा रहे हैं?
एक स्पष्ट संदेश देते हुए मंत्री ने कहा कि अगर कोई विदेशी संस्था यह मानती है कि वह देश के कानून का पालन करने से खुद को बचाने के लिए भारत में स्वतंत्र भाषण के ध्वजवाहक के रूप में खुद को चित्रित कर सकती है, तो ऐसे प्रयास गलत हैं.
क्या था मामला
सूत्रों के मुताबिक ट्विटर एकमात्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है, जिसने नए कानूनों का पालन नहीं किया है. इससे पहले 9 जून को, ट्विटर इंडिया ने सरकार को पत्र लिख कर कहा था कि वह सोशल मीडिया कंपनियों से संबंधित नए दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है और अनुबंध के आधार पर एक नोडल कॉन्ट्रैक्चुअल पर्सन (Nodal Contractual Person) और रेजिडेंट ग्रीवेंस ऑफिसर (आरजीओ) को नियुक्त किया है.
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने पांच जून को कहा था कि उसने ट्विटर को सोशल मीडिया कंपनियों से संबंधित नए नियमों का पालन करने के लिए एक आखिरी मौका दिया है.
मंत्रालय ने पत्र में कहा कि नए मध्यस्थ दिशानिर्देश नियम 26 मई से प्रभावी हो गए हैं. पत्र में कहा गया है कि नियमों के तहत महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यस्थों के प्रावधान 26 मई, 2021 को पहले ही लागू हो चुके हैं और एक सप्ताह से अधिक समय हो गया है, लेकिन ट्विटर ने इन नियमों के प्रावधानों का पालन करने से इनकार कर दिया. यह बताने की जरूरत नहीं है कि इस तरह के गैर-अनुपालन से अनपेक्षित परिणाम होंगे, जिसमें ट्विटर को सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत मध्यस्थ के रूप में देयता से छूट खोना शामिल है.
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